केंचुए की मात्रा
- 10 फिट की लम्बाई में यदि बेड है तो उसमें चार-पांच क्विन्टल कचरा या गोबर होता है। इस गोबर को यदि केचुऐं द्वारा 40-50 दिन में खाना हो तो 3-4 किलो केचुऐं पर्याप्त रहते हैं।
- केचुऐं कम होने पर समय अधिक लगेगा और बहुत अधिक होने पर भी कोई विशेष लाभ नही होता है। कम पूंजी से काम शुरू करने वालों को बेड की लम्बाई कम करनी होगी।
- बेड में केंचुआ डालने से पहले कई जगह हाथ डालकर देख लेना चाहिए कि किसी स्थान पर अधिक गरमी या बदबू तो नही आ रही है।
- जब बेड में सभी तरफ समान नमी, समान तापमान एवं किसी प्रकार की गरमी नही हो तो किसी एक तरफ केचुऐं/अण्डें (पहले से बनी हुई खाद का मिश्रण) रख देते है। उचित परिस्थितियों होने पर केचुएं अपनी सारी बेड में चारों तरफ समान रूप से फैल जायेगें।
- 24 घण्टे में एक केंचुआ अपने वजन का 5 से 7 गुना कचरा खा सकता है और परिस्थितिया विपरीत होने पर कई दिनों तक भूखा भी रह सकता है।
- केचुआ छोडने के एक दिन बाद कुट्टी/कटे हुये बारीक कचरे से चार अंगुल मोटाई में बेड कों ढक दें। ढकते समय ध्यान रहे कि बेड में अब पूर्णतः अंधेरा हो गया है।
- किसी भी स्थिति में बेड में मिटटी नही होनी चहिए। मिटटी मिला गोबर, कचरा केचुओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
- बेड खुली रखने पर केंचुआ खाने और कास्टिंग खाद बनाने का काम सिर्फ रात में करेगा। इससे खाद बहुत धीरे बनेगी।
- बेड को ढकने के लिये सूखे कृषि अवशेष या टाट (Jute) की बोरी भी काम में ली जा सकती है।
- बैड के ढके होने पर पानी की जरूरत लगभग आधी हो जाती हे।
- बेड के ढके होने पर उसमें तापमान ठीक रहता है।
- ढके हुये बेड में केंचुए को अण्डे देने की सुविधा अधिक होती है। अधिक अण्डे देने पर उनकी संख्या में बढोत्तरी अधिक होती हे।
- बेड बनाने के बाद ठण्डा एवं मुलायम बनाये रखने के लिए लगातार पानी छिड़कते रहे।
- बेड में हाथ डालने पर मुलायम अहसास होना चाहिए और गोबर गरम नही लगना चाहिए।
- एक बार बेड बनने एवं उसमें केचुआ डालने के बाद कई दिनों तक कुछ विशेष काम नही होता है।
- हमारा काम केवल केंचुए की परिस्थिति को ठीक बनाये रखने तक सीमित है।
- बेड की लम्बाई और केंचुओं की संख्या के आधार पर खाद के बनने में समय लगता है तब तक रोज बेड की देखभाल करना जरूरी है।
- हर रोज अलग-अलग जगह पर बेड के ऊपर का कचरा हटाकर देखें बेड के ऊपर बहुत बारीक चाय की पत्ती जैसे कास्टिंग खाद दिखाई दे तो समझ ले कि केंचुए ने खाना शुरू कर दिया है।
- बेड में हाथ डालने पर कड़ापन लगने पर पंजे से कुरेरी लगायें और फिर उसे कचरे से ढक दें।
- यही वह समय है जब किसान के धैर्य की परीक्षा होती है जो किसान इस दौरान केंचुए और बेड की देखभाल में लापरवाही बरतने लगते है उनकी यूनिट फेल हो जाती है।
- बेड में पानी की कमी होने पर अन्दर की तरफ डेढ़ फीट चैड़ाई और एक फीट ऊचाई में अच्छी नमी बनी रहती है। इस प्रकार की बैड में 10-15 दिन तक पानी न देने पर भी केचुओं को जिन्दा रखने लायक नमी बनी रहती है । यद्यपि इस स्तर तक केंचुए केवल जिन्दा ही रह पाते है। और खाद बनाने की प्रक्रिया रूक जाती है।
चित्र: वर्मीकम्पोस्ट बनाने के लिये गोबर की बेड में एक ओर केचुऐं व खाद का मिश्रण रखने की विधि को दर्शाता हुआ दृश्य
चित्र: बेड में केंचुऐं छोड़ने के बाद सूखे कचरे से बेड को ढ़कने की विधि
चित्रः सूखें कृषि अवशेष से ढ़के हुये वर्मीबेड का दृश्य
चित्र: टाट के बोरे से ढ़के हुये वर्मीबेड का दृश्य
चित्र: तैयार वर्मीबेड में पानी छिड़कने की विधि का दृश्य
चित्र: वर्मीबेड पर बनी कास्ट का दृश्य







